पौधों में पोषण उनकी वृद्धि, विकास और जीवित रहने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ पौधों में पोषण से संबंधित कुछ मुख्य बिंदु निम्न हैं:
स्वपोषी प्रकृति: पौधे स्वपोषी होते हैं, वे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इसके लिए उन्हें सूर्य के प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड और जल की आवश्यकता होती है।
आवश्यक पोषक तत्व: पौधों को स्वस्थ वृद्धि के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इनमें से कुछ तत्व हवा और पानी से प्राप्त होते हैं, जबकि बाकी मिट्टी से खनिज के रूप में मिलते हैं।
मैक्रोन्यूट्रिएंट्स (Macronutrients): ये वो पोषक तत्व हैं जिनकी पौधों को बड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है। इनमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और सल्फर शामिल हैं।
माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (Micronutrients): ये वो पोषक तत्व हैं जिनकी पौधों को बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है, लेकिन इनकी कमी भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है। इनमें लोहा, मैंगनीज, बोरॉन, जिंक, तांबा, मोलिब्डेनम, क्लोरीन और निकल शामिल हैं।
पोषक तत्वों के कार्य: प्रत्येक पोषक तत्व का पौधे में एक विशिष्ट कार्य होता है। उदाहरण के लिए, नाइट्रोजन पत्तियों की वृद्धि और क्लोरोफिल निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है।
मिट्टी से अवशोषण: अधिकांश खनिज पोषक तत्व पौधों की जड़ों द्वारा मिट्टी से पानी में घुले हुए आयनों के रूप में अवशोषित होते हैं। जड़ के root hair अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र को बढ़ाते हैं।
प्रकाश संश्लेषण: वह प्रक्रिया जिसके द्वारा पौधे सूर्य के प्रकाश ऊर्जा का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड और जल से भोजन बनाते हैं। क्लोरोफिल इस प्रक्रिया के लिए आवश्यक होता है।
जल का महत्व: जल पौधों के पोषण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह पोषक तत्वों को मिट्टी से जड़ों तक पहुंचाने और फिर पौधे के विभिन्न हिस्सों तक ले जाने का माध्यम है।
पोषक तत्वों की कमी के लक्षण: जब पौधों में किसी आवश्यक पोषक तत्व की कमी होती है, तो वे विशिष्ट लक्षण दिखाते हैं, जैसे पत्तियों का पीला पड़ना (नाइट्रोजन की कमी), पत्तियों पर धब्बे (पोटेशियम की कमी), या विकास का रुकना।
उर्वरक और खाद: किसान अक्सर मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए रासायनिक उर्वरकों (जैसे यूरिया, DAP, पोटाश) और जैविक खाद (जैसे गोबर की खाद, कम्पोस्ट) का उपयोग करते हैं।