हंटावायरस एक दुर्लभ लेकिन गंभीर वायरस है, जो मुख्य रूप से चूहों जैसे कृन्तकों से फैलता है और फेफड़ों या किडनी को प्रभावित कर सकता है।
यह वायरस हिरण चूहे, कॉटन रैट और राइस रैट जैसे कृन्तकों में पाया जाता है। ये खुद बीमार नहीं होते लेकिन वायरस फैलाते हैं।
चूहों के मूत्र, लार या मल के सूखे कण हवा में मिलकर सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
संक्रमित सतह छूने के बाद मुंह या नाक छूने से संक्रमण हो सकता है। संक्रमित चूहे के काटने से भी खतरा बढ़ता है।
हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) फेफड़ों में पानी भर देता है, जिससे सांस लेने में गंभीर कठिनाई हो सकती है।
यूरोप और एशिया में पाए जाने वाला HFRS किडनी को प्रभावित करता है और तेज बुखार, सिरदर्द व लो ब्लड प्रेशर पैदा कर सकता है।
बुखार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, उल्टी और पेट दर्द इसके शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
कुछ दिनों बाद अचानक तेज खांसी और सांस लेने में गंभीर परेशानी शुरू हो सकती है। यह मेडिकल इमरजेंसी है।
हंटावायरस का कोई खास इलाज या वैक्सीन नहीं है। अस्पताल में ऑक्सीजन और supportive care दी जाती है।
घर में चूहों को न पनपने दें, छेद बंद करें और सूखे मल को झाड़ू से साफ करने की बजाय पहले disinfectant से गीला करें।