वॉम्बैट दुनिया का एकमात्र ज्ञात जीवित स्तनपायी है जो लगभग घनाकार मल त्यागता है। वैज्ञानिकों ने आखिरकार इसका रहस्य समझ लिया है।
एक वॉम्बैट रात में लगभग 80 से 100 छोटे घनाकार मल के टुकड़े छोड़ सकता है। यह अनोखी विशेषता उसे दूसरे जानवरों से अलग बनाती है।
यह एक लोकप्रिय मिथक है। वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला कि वॉम्बैट का sphincter यानी गुदा की मांसपेशीय संरचना गोलाकार होती है।
मल का घनाकार आकार गुदा में नहीं बनता। यह वॉम्बैट की आंत के अंतिम लगभग 8–10% हिस्से में आकार लेना शुरू करता है।
आंत के इस हिस्से में अलग-अलग कठोरता वाले क्षेत्र होते हैं। दो कठोर और दो अधिक लचीले हिस्से मल को दबाकर सपाट किनारे और कोने बनाने में मदद करते हैं।
आंत की मांसपेशियां असमान दबाव डालती हैं। इसी प्रक्रिया में नरम मल धीरे-धीरे दबकर सपाट सतहों और स्पष्ट किनारों वाले क्यूब का आकार लेता है।
वॉम्बैट का पाचन बेहद धीमा होता है और भोजन को पाचन तंत्र से गुजरने में लगभग 14–18 दिन लग सकते हैं। इस दौरान पानी का बड़ा हिस्सा अवशोषित हो जाता है।
वॉम्बैट चट्टानों, लकड़ियों और छोटी ऊंची जगहों पर मल से अपना क्षेत्र चिह्नित करता है। क्यूब के सपाट किनारे मल को ढलान से लुढ़कने से रोकते हैं।
वॉम्बैट के क्यूब आकार वाले मल के पीछे की भौतिक प्रक्रिया पर शोध को 2019 का Ig Nobel Prize in Physics मिला। इसने जीव विज्ञान और भौतिकी को जोड़ दिया।
वैज्ञानिक अब वॉम्बैट की आंत की इस प्राकृतिक प्रक्रिया से प्रेरणा लेकर बिना पारंपरिक molds के नरम पदार्थों को आकार देने की नई तकनीकों पर विचार कर रहे हैं।