लिंग गुणसूत्रों में, लैंगिक लक्षणों के अलावा, कुछ अन्य, गैरलैंगिक जीन्स भी होते हैं। इन्हीं लक्षणों को लिंग-सहलग्न आनुवंशिक गुण या लक्षण कहते है और इनकी वंशागति को लिंग-सहलग्न वंशागति (sex-linked inheritance) कहते हैं।
मानव के कुछ आनुवंशिक रोगों के जीन X लिंग गुणसूत्रों में होते हैं। इनमें से अधिकांश रोगों के जीन अप्रबल या सुप्त (recessive) होते हैं।
सुप्त होने के कारण ये रोग संकर, अर्थात् विषमयुग्मजी (heterozygous) स्त्रियों में नहीं होते हैं।
पुत्रों को इन लक्षणों के जीन कभी पिता से नहीं मिल सकते, क्योंकि पुरुष का अकेला X गुणसूत्र सदैव पुत्रियों में जाता है।
मानव के दुर्बल X-सहलग्न लक्षणों में वर्णान्धता तथा हीमोफिलिया के रोग बहुत प्रसिद्ध हैं।
Colorblind व्यक्ति लाल व हरे रंग का भेद नहीं कर पाते हैं इसीलिए, इस रोग को लाल-हरा अन्धापन (red-green blindness) भी कहते हैं। इसे प्रोटॉन दोष या डैल्टोनिज्म (proton defect or daltonism) भी कहते हैं।
हीमोफिलिया के रोगियों के रुधिर में factor VIII नहीं होता है, जिसके कारण चोट लगने पर काफी समय (1/2 से 24 घण्टे) तक, थक्का नहीं जमता और रुधिर बराबर बहता रहता है। इसीलिए, इसे रक्तस्रावण रोग (bleeder's disease) भी कहते हैं।
मनुष्य के कुछ X-सहलग्न आनुवंशिक लक्षण, जैसे दाँतों का खराब इनैमल (enamel), सुप्त नहीं, ब्लकि प्रबल (dominant) जीन्स के कारण होते हैं।