पादप (plants) में जनन

 पौधों तथा जीवों में अपनी प्रजाति बनाये रखने के लिए जनन की प्रक्रिया आवश्यक हैं। आज देखते हैं पौधे कैसे जनन करते हैं।

पौधों में जनन दो प्रकार से होता हैं - अलैंगिक जनन तथा लैंगिक जनन

अलैंगिक जनन कई विधियों द्वारा होता हैं जिनमें शामिल है कायिक प्रवर्धन, मुकुलन, खंडन, तथा बीजाणु निर्माण।

कायिक प्रवर्धन: पादप के कायिक भागों जैसे मूल, तना पत्ती अथवा कली के द्वारा नए पादप को प्राप्त करना कायिक प्रवर्धन कहलाता है। उदाहरण : गुलाब अथवा चंपा के पौधे की एक शाखा को उसकी पर्वसंधि से काटकर एक नया पौधा निकल आता है।

मुकुलन: इसे हम yeast में माइक्रोस्कोप की सहायता से देख सकते हैं। इसमें उचित वातावरण और पर्याप्त पोषण में yeast कुछ ही घंटे में वृद्धि करके जनन करने लगते हैं।

खंडन: जब शैवाल को जल और पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं तो यह खंडन विधि द्वारा तेजी से वृद्धि करते हैं। शैवाल दो या दो से अधिक खण्डों में विभाजित होने लगते हैं और प्रत्येक खंड एक नए जीव में वृद्धि कर जाता है।

बीजाणु निर्माण: जब पौधे में से बीजाणु निरमुक्त होते हैं तो यह वायु में तैरते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच जाते है। प्रत्येक बीजाणु एक कठोर सुरक्षात्मक आवरण से ढका रहता है जिससे यह लंबे समय तक जीवित रहे और अनुकूल स्थिति मिलने पर यह अंकुरित होकर नए जीव में विकसित हो जाते हैं।

पादपो में लैंगिक जनन के लिए जनन अंग होते हैं। यह जनन अंग पुष्प होते हैं। नर जनन अंगों को पुंकेसर तथा मादा जनन अंगों को स्त्रीकेसर कहा जाता है।