परागण (Pollination) का अर्थ क्या है आइये जानते हैं 

परागकणों के परागकोश (anther) से वर्तिकाग्र (stigma) तक पहुँचने की इस क्रिया को ही परागण (pollination) कहते हैं।

पुंकेसरों में परागकणों (pollen grains) का निर्माण होता है जो नर युग्मक अथवा शुक्राणु (sperms) उत्पन्न करते हैं।

स्त्रीकेसरों में अण्डाशय का निर्माण होता है जिसमें मादा युग्मक अथवा अण्डाणु (egg) बनता है।

प्रजनन क्रिया का पूरा होने के लिए नर तथा मादा युग्मकों का संयुग्मन (fusion) होना आवश्यक है।

अधिकांश पौधों में परागकणों (pollen grains) के संचालन (locomotion) का अभाव होता है, जिस कारण

परागकणों को gynoecium तक पहुँचने के लिये विभिन्न ढंग अपनाने पड़ते हैं।

परागण के बाद पुंकेसर (stamen) और दल (Petals) गिर जाते हैं, बाह्यदल या तो गिर जाते हैं या फल में जुड़े रहते हैं।

परागण (pollination) दो प्रकार का होता है-

स्व-परागण (Self-pollinations) पर-परागण (Cross-pollinations)