संचार माध्यम आज हमारे जीवन का अहम हिस्सा हैं। ये केवल सूचना नहीं देते, बल्कि सोच और समाज को भी प्रभावित करते हैं।
मीडिया ‘मीडियम’ का बहुवचन है। फोन, अखबार, टीवी और इंटरनेट—ये सभी विचारों के आदान-प्रदान के माध्यम हैं।
जब एक सूचना अखबार, रेडियो, टीवी और इंटरनेट के माध्यम से एक साथ लाखों लोगों तक पहुँचती है, तो उसे जनसंचार माध्यम कहते हैं।
आज तकनीक के साथ मीडिया बदलता जा रहा है। अखबार से रेडियो, टीवी और अब सोशल मीडिया तक सूचना सीधे पहुँचने लगी है।
मीडिया को चलाने में भारी खर्च होता है। इसलिए अधिकतर मीडिया संस्थान विज्ञापनों और बड़े व्यापारिक समूहों पर निर्भर होते हैं।
मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है क्योंकि यह सरकार के कामों की जानकारी से लेकर जनता की आवाज़ उठाने तक सभी में सहायता करता है।
मीडिया तय करता है कि किन मुद्दों पर चर्चा होगी। जो खबरें बार-बार दिखाई जाती हैं वह समाज का एजेंडा बन जाती हैं।
एक अच्छी रिपोर्ट वही होती है जो बिना पक्षपात दोनों पक्ष को सामने रखे और निर्णय जनता पर छोड़ दे।
सेंसरशिप में सरकार कुछ सामग्री को रोक सकती है। वहीं स्थानीय मीडिया आम लोगों की समस्याओं को सामने लाती है।
सोशल मीडिया ने सभी को अपनी बात रखने का मौका दिया, लेकिन फेक न्यूज़ से सावधान रहना भी ज़रूरी है।