जानिए बैक्टीरिया से जुड़े कुछ अनसुने तथ्य के बारे में 

हेन्सन (Hensen) ने सन् 1874 में कुष्ठ रोग (leprosy) को उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया, माइकोबैक्टीरियम लेपरी (Mycobacterium leprae) की खोज की थी।

पाश्चुरीकरण द्वारा दूध को दूषित होने से रोका जा सकता है। इस तकनीक को पाश्चर ने सन् 1964 में विकसित किया था।

Beijerinck ने सन् 1888 में पता लगाया कि राइजोबियम नामक बैक्टीरिया फलीदार पौधों की जड़ों की ग्रन्थिकाओं में नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता हैं।

Bdellovibrio bacteriovorus नामक बैक्टीरिया गंगा के जल को शुद्ध बनाए रखता है।

प्लाज्मिड का आकार 50-4000 kb होता है।

सूक्ष्मजीवों द्वारा पर्यावरण के प्रदूषकों को नष्ट करने की विधि को जैव उपचार (bio remediation) कहते हैं।

खदानों में से सूक्ष्म जीवों, जैसे- थायोबेसीलस थाओऑक्सीडेन्स द्वारा धातुओं के निक्षालन को जैव निक्षालन कहते हैं।