वॉम्बैट दुनिया का एकमात्र ज्ञात जीवित स्तनपायी है जो लगभग घनाकार मल त्यागता है। वैज्ञानिकों ने आखिरकार इसका रहस्य समझ लिया है।

वॉम्बैट की पॉटी चौकोर क्यों होती है?

एक वॉम्बैट रात में लगभग 80 से 100 छोटे घनाकार मल के टुकड़े छोड़ सकता है। यह अनोखी विशेषता उसे दूसरे जानवरों से अलग बनाती है।

एक रात में 100 तक क्यूब!

यह एक लोकप्रिय मिथक है। वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला कि वॉम्बैट का sphincter यानी गुदा की मांसपेशीय संरचना गोलाकार होती है।

क्या वॉम्बैट का गुदा चौकोर होता है?

मल का घनाकार आकार गुदा में नहीं बनता। यह वॉम्बैट की आंत के अंतिम लगभग 8–10% हिस्से में आकार लेना शुरू करता है।

असल रहस्य आंत के अंदर है!

आंत के इस हिस्से में अलग-अलग कठोरता वाले क्षेत्र होते हैं। दो कठोर और दो अधिक लचीले हिस्से मल को दबाकर सपाट किनारे और कोने बनाने में मदद करते हैं।

आंत की दीवार बनाती है क्यूब

आंत की मांसपेशियां असमान दबाव डालती हैं। इसी प्रक्रिया में नरम मल धीरे-धीरे दबकर सपाट सतहों और स्पष्ट किनारों वाले क्यूब का आकार लेता है।

आंत की लयबद्ध सिकुड़न का कमाल

वॉम्बैट का पाचन बेहद धीमा होता है और भोजन को पाचन तंत्र से गुजरने में लगभग 14–18 दिन लग सकते हैं। इस दौरान पानी का बड़ा हिस्सा अवशोषित हो जाता है।

वॉम्बैट इतना धीरे पचाता है!

वॉम्बैट चट्टानों, लकड़ियों और छोटी ऊंची जगहों पर मल से अपना क्षेत्र चिह्नित करता है। क्यूब के सपाट किनारे मल को ढलान से लुढ़कने से रोकते हैं।

क्यूब का आकार क्यों फायदेमंद है?

वॉम्बैट के क्यूब आकार वाले मल के पीछे की भौतिक प्रक्रिया पर शोध को 2019 का Ig Nobel Prize in Physics मिला। इसने जीव विज्ञान और भौतिकी को जोड़ दिया।

इस अजीब खोज ने जीता Ig Nobel

वैज्ञानिक अब वॉम्बैट की आंत की इस प्राकृतिक प्रक्रिया से प्रेरणा लेकर बिना पारंपरिक molds के नरम पदार्थों को आकार देने की नई तकनीकों पर विचार कर रहे हैं।

वॉम्बैट से इंसानों को क्या सीख मिली?