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भूमि, मृदा, जल, प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीव संसाधन – Class 8 NCERT Solution

भूमि, मृदा, जल, प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीव संसाधन – Class 8 NCERT Solution

NCERT कक्षा 8 की सामाजिक अध्ययन की पाठ्य पुस्तक "संसाधन एवं विकास (VIII)"

पाठ - 2 भूमि, मृदा, जल, प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीव संसाधन

- अभ्यास कार्य

NCERT की कक्षा 8 की हिंदी विषय की किताब “संसाधन एवं विकास (VIII)” के सभी पाठों की कहानियों तथा कविताओं के अभ्यास कार्यों का वर्णन करेंगे और उसके प्रश्नों का उत्तर देंगे।

हम “भूमि, मृदा, जल, प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीव संसाधन” पाठ का अध्ययन करने के बाद इससे सम्बंधित कुछ प्रश्नों को निकालेंगे और उनके उत्तर का वर्णन करेंगे।

भूमि, मृदा, जल, प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीव संसाधन - प्रश्न-अभ्यास NCERT

अभ्यास

1. निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए- 
 
(i) मृदा निर्माण के लिए उत्तरदायी दो मुख्य जलवायु कारक कौन-से है? 
उत्तर – मृदा निर्माण के लिए तापमान तथा वर्षा दो मुख्य उत्तरदायी जलवायु कारक है। 
(ii) भूमि निम्नीकरण के कोई दो कारण लिखिए। 
उत्तर – भूमि के निम्नीकरण में सहायक दो कारक अतिचरण तथा रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग है। 
(iii) भूमि को महत्त्वपूर्ण संसाधन क्यों माना जाता है? 
उत्तर – भूमि को महत्वपूर्ण संसाधन इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें कई वनस्पतियां उगती हैं और यह कई जीव जंतुओं का घर भी है। भूमि का उपयोग कृषि, खनन, सड़कों और उद्योगों की स्थापना करने के लिए भी किया जाता है। 
(iv) किन्हीं दो सोपानों के नाम बताइए जिन्हें सरकार ने पौधों और प्राणियों के संरक्षण के लिए आरंभ किया है। 
उत्तर – दो सोपानों के नाम, जिन्हें सरकार ने पौधों और प्राणियों के संरक्षण के लिए आरंभ किया है वह हैं राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव अभ्यारण्य। इनके अंदर जानकारों का शिकार करना और वृक्षों को काटना मना है।
(v) जल संरक्षण के तीन तरीके बताइए। 
उत्तर – जल संरक्षण के तीन तरीके हैं 
  1. बारिश के पानी का सदुपयोग
  2. सिंचाई के लिए स्प्रिंग कलर का इस्तेमाल करना जिससे हाल हानि ना हो। 
  3. जल रिसाव को कम करने के लिए खेतों को सींचने वाली नहरों को पक्का करना। 
2. सही उत्तर को चिह्नित कीजिए 
 
(i) निम्नलिखित में से कौन-सा कारक मृदा निर्माण का नहीं है? 
(क) समय
(ख) मृदा का गठन
(ग) जैव पदार्थ 
 
उत्तर – (ख) मृदा का गठन 
(ii) निम्नलिखित में से कौन-सी विधि तीव्र ढालों पर मृदा अपरदन को रोकने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है? 
(क) रक्षक मेखला
(ख) मलचिंग
(ग) वेदिका कृषि 
 
उत्तर – (ग) वेदिका कृषि 
(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा प्रकृति के संरक्षण के अनुकूल नहीं है? 
(क) बल्ब को बंद कर देना चाहिए जब आवश्यकता न हो।
(ख) नल को उपयोग के बाद तुरंत बंद कर देना चाहिए।
(ग) खरीददारी के बाद पॉली पैक को नष्ट कर देना चाहिए। 
 
उत्तर – (ग) खरीददारी के बाद पॉली पैक को नष्ट कर देना चाहिए। 
3. निम्नलिखित का मिलान कीजिए 
(क) भूमि उपयोग(i) मृदा अपरदन को रोकना
(ख) ह्यूमस(ii) स्थलमंडल, जलमंडल और वायुमंडल के बीच जुड़ा एक संकरा क्षेत्र
(ग) चट्टान बाँध(iii) भूमि का उत्पादनकारी उपयोग
(घ) जैवमंडल(iv) ऊपरी मृदा पर निक्षेपित जैव पदार्थ
 (v) समोच्चरेखीय जुताई

उत्तर –

(क) भूमि उपयोग(iii) भूमि का उत्पादनकारी उपयोग
(ख) ह्यूमस(iv) ऊपरी मृदा पर निक्षेपित जैव पदार्थ
(ग) चट्टान बाँध(i) मृदा अपरदन को रोकना
(घ) जैवमंडल(ii) स्थलमंडल, जलमंडल और वायुमंडल के बीच जुड़ा एक संकरा क्षेत्र

4. निम्नलिखित कथनों में ये सत्य अथवा असत्य बताइए। यदि सत्य है तो उसके कारण लिखिए- 
 
(i) भारत का गंगा, ब्रह्मपुत्र का मैदान अत्यधिक आबाद प्रदेश है।
(ii) भारत में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता कम हो रही है।
(iii) तटीय क्षेत्रों में पवन गति रोकने के लिए वृक्ष कतार में लगाए जाते हैं, जिसे बीच की फसल उगाना कहते हैं।
(iv) मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु परिवर्तन पारितंत्र को व्यवस्थित रख सकते हैं।
उत्तर – 
 
(i) भारत का गंगा, ब्रह्मपुत्र का मैदान अत्यधिक आबाद प्रदेश है। (सत्य)
कारण– क्योंकि इसके आसपास की मिटटी उपजाऊ तथा समतल होती है जिसका उपयोग खेती, पशु चराई के लिए आसानी से किया जा सकता है। 
 
(ii) भारत में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता कम हो रही है। (सत्य)
कारण– पानी की बर्बादी से, वनों की कटाई, और नदियों के पानी का दूषित होना इसक मुख्य कारण है। ऐसे कई देश हैं जहां हर साल सूखे की समस्या देखी जाती है। 
 
(iii) तटीय क्षेत्रों में पवन गति रोकने के लिए वृक्ष कतार में लगाए जाते हैं, जिसे बीच की फसल उगाना कहते हैं। (असत्य)
कारण– इस प्रक्रिया को रक्षक मेखलाएँ कहते हैं। ऐसा इसलिए करते हैं ताकि मृदा आवरण को बचा सके। 
 
(iv) मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु परिवर्तन पारितंत्र को व्यवस्थित रख सकते हैं। (असत्य)
कारण– मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु परिवर्तन से पारितंत्र को नुकसान होता है और इसका संतुलन बिगड़ जाता है।
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