B.Ed. Sem 3-मूल्यांकन का अर्थ, परिभाषा तथा विशेषताएं (Evaluation) 

B.Ed. Sem 3- Unit 1 notes

B. Ed. के द्वि-वर्षीय पाठ्यक्रम के तृतीय सेमेस्टर के विषय शिक्षा में मापन तथा मूल्यांकन (Measurement and Evaluation in Education) के सभी Unit के कुछ महत्वपुर्ण प्रश्नों का वर्णन यहाँ किया गया है। 

मूल्यांकन का अर्थ, परिभाषा तथा विशेषताएं (Meaning, Definition and Characteristics of Evaluation)

मूल्यांकन का अर्थ (Meaning of Evaluation):

मूल्यांकन की प्रक्रिया शिक्षा प्रक्रिया का ही अभिन्न अंग (Integral Part) है और यह शिक्षण के साथ ही चलती रहती है। राइटस्टोन (J. W. Wrightstone) के अनुसार, “मूल्यांकन एक नवीन प्राविधिक पद (New Technical Term) है जिसका प्रयोग मापन (Measurement) की धारणा को परम्परागत परीक्षणों एवं समीक्षाओं (Conventional Tests and Examinations) की अपेक्षा व्यापक रूप में व्यक्त करने के लिये किया गया है।” हमें पता है कि शिक्षा के अनेक उद्देश्य होते हैं। शिक्षा के इन समस्त उद्देश्यों का मुख्य उद्देश्य बालकों या छात्रों के व्यक्तित्व (Personality) के विभिन्न पहलुओं; जैसे- शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक, सामाजिक, नैतिक आदि का वांछित विकास करना या सम्पूर्ण व्यवहार (Total Behaviour) में ऐसा परिवर्तन लाना है जो व्यक्ति एवं समाज दोनों की दृष्टि से उचित तथा लाभदायक हो। 
 
इस बहुमुखी उद्देश्य की पूर्ति के लिए जिसमें छात्रों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास हो व उसके सम्पूर्ण व्यवहार में वांछित परिवर्तन (Desirable Changes) हो, इसके लिए शिक्षा के अन्य पहलुओं जैसे- पाठ्यक्रम, शिक्षण-विधि, विद्यालय, शिक्षक, शिक्षार्थी, अनुशासन आदि का निर्धारण करना आवश्यक है। इन पहलुओं में शिक्षण विधि वह पहलू है जो शिक्षा के उद्देश्य सहित अन्य सभी पहलुओं को भी साकार रूप प्रदान करता है। 
 
शिक्षण प्रक्रिया कहाँ तक शिक्षा के विभिन्न पहलुओं को साकार रूप प्रदान करने में सफल हुई है अर्थात् शिक्षण प्रक्रिया कहाँ तक छात्रों के व्यक्तित्व के विकास व सम्पूर्ण व्यवहार में वांछित परिवर्तन लाने में सफल हो रही है, इसकी विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक मानदण्डों (Standards) के आधार पर विभिन्न पदों द्वारा निरन्तर विधि (Techniques) से जाँच-पड़ताल व व्याख्या करते रहने की प्रक्रिया को मूल्यांकन (Evaluation) कहते हैं। 
 
मूल्यांकन केवल छात्रों द्वारा अर्जित ज्ञान की परीक्षा व मापन नहीं है बल्कि शिक्षा के समस्त पहलुओं और शिक्षण द्वारा इन पहलुओं को कार्यान्वित रूप देने से छात्रों के व्यवहार में जो परिवर्तन आता है उस सबकी निरन्तर जाँच-पड़ताल व व्याख्या आदि करना ही मूल्यांकन है। 

मूल्यांकन की परिभाषा (Definition of Evaluation):

मूल्यांकन की कुछ महत्वपूर्ण परिभाषा निम्नलिखित है: 
 
(1) ब्रेडफील्ड के अनुसार –
“मूल्यांकन का कार्य तत्त्वों के लिए प्रतीक निर्धारण करना है जो विभिन्न तत्त्वों की उपयोगिता या महत्त्व को लाक्षणिक रूप प्रदान करता है। साधारणतया यह कार्य कुछ विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक या वैज्ञानिक स्तरों को नापने के लिए किया जाता है।” 
 
(2) क्विलन एवं हैना के अनुसार –
“बालकों द्वारा विद्यालय में प्रगति पर जो उनमें व्यावहारिक परिवर्तन होते हैं उनके विषय में सूचना एकत्रित करने एवं उनकी व्याख्या करने की प्रक्रिया ही मूल्यांकन है।” 
 
(3) कोठारी आयोग के अनुसार –
मूल्यांकन एक क्रमिक प्रक्रिया है जो कि सम्पूर्ण शिक्षा प्रणाली का एक महत्त्वपूर्ण अंग है और जो शिक्षा के उद्देश्यों से घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित है।”

मूल्यांकन की विशेषताएँ (Characteristics of Evaluation) :

यदि हम मूल्यांकन प्रक्रिया के अर्थ एवं परिभाषा पर एक बार फिर नजर डालें तो हमें उसकी निम्नलिखित विशेषताओं का पता चलता है- 
  1. मूल्यांकन वस्तुतः एक व्यापक प्रक्रिया (Wider Process) होती है जिसमें मापन एवं जाँच दोनों संम्मिलित रहते हैं।
  2. यह एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया (Continuous Process) है जिसके द्वारा छात्रों के दिन-प्रतिदिन के व्यावहारिक परिवर्तनों की जाँच की जाती है।
  3. मूल्यांकन का क्षेत्र (Scope) अत्यधिक विस्तृत होता है। यह छात्रों के व्यक्तित्व के समस्त पहलुओं (All Aspects of Personality) जैसे- शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक, सामाजिक, चारित्रिक आदि का मूल्यांकन करता है। इस सन्दर्भ में यह प्रक्रिया इस बात पर भी ध्यान देती है कि समाज के आदर्शों एवं मापदण्डों के अनुकूल शिक्षण हो रहा है या नहीं।
  4. मूल्यांकन सम्पूर्ण शिक्षा-प्रणाली का एक अत्यधिक महत्त्वपूर्ण अंग (Integral Part) है और इसका शिक्षा के विभिन्न पाठ्यक्रम अंगों जैसे- शिक्षा के उद्देश्य, पाठ्यक्रम, शिक्षण विधि, परीक्षा आदि सभी अंगों से घनिष्ठतम सम्बन्ध होता है। इस प्रक्रिया द्वारा यह पता चलता है कि किस सीमा तक शिक्षा के उद्देश्य की प्राप्ति हो रही है।
  5. यह प्रक्रिया न केवल शैक्षिक निष्पत्ति (Educational Achievement) का मापन करती है बल्कि सम्पूर्ण शिक्षा प्रणाली में भी सुधार (Reform) करती है।
  6. मूल्यांकन एक निर्णयात्मक प्रक्रिया (Deterministic Process) है। यह प्रक्रिया सीखने की क्रियाओं से उत्पन्न अनुभवों की उपयोगिता के सम्बन्ध में निर्णय देती है।

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