B.Ed. Sem 2- Unit 1 notes
B. Ed. के द्वि-वर्षीय पाठ्यक्रम के द्वितीय सेमेस्टर के विषय शिक्षा में अनिवार्य प्रश्न पत्र, विज्ञान (Science) विषय के सभी Unit के कुछ महत्वपुर्ण प्रश्नों का वर्णन यहाँ किया गया है।
विज्ञान और उसका महत्त्व (Science and its Importance)
आधुनिक युग विज्ञान का युग है। चारों और इसी का ही बोलबाला है। मानव इस संसार की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए विज्ञान का आश्रय ही ले रहा है। साथ ही इस संसार को छोड़कर अन्य ग्रहों पर पहुँचने का प्रयास कर रहा है। विज्ञान के बिना हम आधुनिक जीवन में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकते हैं। हमारे जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं के साथ विज्ञान का घनिष्ठ सम्बन्ध है। एक समय था जब मनुष्य जानवरों का-सा जीवन व्यतीत करता था। धीरे धीरे वैज्ञानिक प्रगति ने हमारी सभ्यता को अपनी चरम सीमा पर ला दिया है। विज्ञान ने प्रकृति पर विजय प्राप्त कर ली है। विज्ञान, वैज्ञानिक और सामाजिक दोनों ही क्षेत्रों में मानव के विकास के लिए अत्यन्त आवश्यक है।
(1) विज्ञान और व्यक्ति- व्यक्ति के वैयक्तिक जीवन में विज्ञान ने खुशियों का संचार कर दिया है। आधुनिक युग में ऐसे-ऐसे वैज्ञानिक आविष्कार हो चुके हैं कि हमारी अनेक व्यक्तिगत समस्यायें आसानी से ही सुलझ जाती हैं। विज्ञान ने समय और दूरी की समस्या का समाधान कर दिया है।
क्षण भर में ही हम दिल्ली में बैठे हुए न्यूयार्क से सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं। कुछ घण्टों में हम विश्व के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुँच सकते हैं। वैज्ञानिक आविष्कारों ने समस्त संसार को एक कर दिया है। टेलीफोन, टेलीग्राफ, रॉकेट आदि ऐसे आविष्कार हैं जिन्होंने वैयक्तिक जीवन में हर कार्य सुलभ बना दिया है।
विज्ञान ने हमारी बीमारियों को कम कर दिया है। आज वैज्ञानिक बड़ी-से-बड़ी बीमारियों का तुरन्त इलाज करने की क्षमता रखते हैं। यही नहीं वे मृत्यु पर भी विजय प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील हैं।
(2) विज्ञान और समाज– व्यक्तिगत जीवन में विज्ञान का जितना अधिक महत्त्व है, सामाजिक जीवन में उसका उससे कहीं अधिक महत्त्व है, यदि वैज्ञानिक आविष्कार न हुए होते तब भी हम जीवित रह सकते थे परन्तु कल्पना कीजिये कि यदि रेडियो, टेलीफोन, हवाई जहाज, बिजली, रेलवे-इंजन आदि का आविष्कार न हुआ होता तो हमारे समाज की क्या दशा होती ? हमारा समाज इन वैज्ञानिक आविष्कारों का अत्यन्त ऋणी है।
समाज के लिए विज्ञान की शिक्षा विभिन्न रूपों में उपयोगी है-
- समाज का वैज्ञानिक दृष्टिकोण– जैसा कि हम पहले उल्लेख कर चुके हैं कि हमारा दृष्टिकोण तेजी से बदल रहा है और ये विचार कि बीमारी, गरीबी, भुखमरी और युद्ध आदि ईश्वरीय देन है, धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं। यह विज्ञान का ही प्रताप है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास के लिए विद्यालय में विज्ञान के पाठ्यक्रम का समावेश अत्यन्त आवश्यक है।
- कृषि हेतु विज्ञान– भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ की जनता का 3/4 से अधिक भाग कृषि पर ही निर्भर रहता है। भारतीय कृषि को ‘मौसम का जुआ’ की संज्ञा दी जाती है। यहाँ आज भी अधिकतर किसान प्राकृतिक साधनों पर निर्भर हैं और हमारी कृषि विज्ञान पर आधारित नहीं है। कृषि की उन्नति और विकास हेतु वैज्ञानिक उपकरणों का प्रयोग, वैज्ञानिक ढंग से उत्पन्न की गयी खाद का प्रयोग आवश्यक है। इस दृष्टिकोण से विज्ञान के प्रशिक्षण का विशेष महत्त्व है।
- आर्थिक विकास और विज्ञान– आर्थिक दृष्टि से हमारा समाज बहुत पिछड़ा हुआ है। पाश्चात्य देशों ने वैज्ञानिक आविष्कारों के माध्यम से बड़ी तेजी के साथ अपना आर्थिक विकास किया। भारतीय समाज का भी पंचवर्षीय योजनाओं के द्वारा आर्थिक विकास किया जा रहा है। हम अपने आर्थिक विकास की गति को वैज्ञानिक साधनों का उपयोग करके तीव्र कर सकते हैं।
- लोकतांत्रिक विचारधारा और विश्वबन्धुत्व की भावना का विकास– आधुनिक युग लोकतंत्र का युग है। सर्वत्र लोकतंत्र की दुहाई दी जा रही है। साथ ही संकुचित राष्ट्रीय भावना को त्याग कर विश्वबन्धुत्व की भावना का प्रचार किया जा रहा है। यदि वैज्ञानिक आविष्कार न हुए होते तो आज भी समाज रायल तंत्रात्मक व्यवस्था के अन्दर पिसता होता। मानव जाति अपनी संकीर्ण भावना से घिरी होती और विश्व के प्रत्येक कोने में तेजी से जो प्रगति होती दिखाई देती है, वह सम्भव न होती।
सामाजिक क्षेत्र में यह स्मरण रखना चाहिए कि जहाँ विज्ञान ने हमारे समाज की अत्यधिक सेवा की है, वहीं उसने सामाजिक विषमताओं और कटुताओं को भी और अधिक बढ़ा दिया है। आधुनिक वैज्ञानिक युग में समाज इतना अधिक भौतिकवादी हो गया है कि मनुष्य अन्धा होकर दौड़ा चला जा रहा है। बेकारी आदि की समस्याओं ने भीषण रूप धारण कर लिया है और समाज में ईर्ष्या और द्वेष की भावना बहुत अधिक मात्रा में विद्यमान है परन्तु यह विज्ञान का दोष नहीं, हमारी संकुचित विचारधारा का दोष है।
3) विज्ञान और मानव सभ्यता– मानव सभ्यता विज्ञान की महान देन है। वास्तव में विज्ञान की कृपा से ही चरवाहा, आखेट और कृषि-युग को पार करते हुए आज हम अन्तरिक्ष-युग में आ गये हैं। वह दिन दूर नहीं जब हमारी सभ्यता केवल पृथ्वी पर ही नहीं रहेगी, वरन् अन्य नक्षत्रों में भी उसका प्रसार हो जायेगा, परन्तु यही विज्ञान हमारी सभ्यता का विनाश भी कर सकता है। यदि हमने सुबुद्धि से कार्य न लिया, तो निःसन्देह आज के ऐटम और हाइड्रोजन बम मानव सभ्यता का सर्वनाश करके रख देंगे।
अन्त में हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि आधुनिक जीवन में विज्ञान का अत्यधिक महत्त्व है। यदि हम वैज्ञानिक आविष्कारों का प्रयोग मानव जाति के उत्थान के लिए करेंगे तो निःसन्देह हम विश्व का बहुत बड़ा कल्याण करेंगे। एक विद्वान ने लिखा है, “विज्ञान ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बड़े क्रान्तिकारी परिवर्तन किये हैं। स्मरण रखना चाहिए कि विज्ञान एक वरदान है और एक अभिशाप भी। हमें उसके उज्ज्वल पक्ष को ग्रहण करना चाहिए, अँधेरे को नहीं।”