B.Ed. Sem 2-विज्ञान की आधारभूत विशेषताएँ क्या हैं? (Basic Characteristics of Science) 

B.Ed. Sem 2- Unit 1 notes

B. Ed. के द्वि-वर्षीय पाठ्यक्रम के द्वितीय सेमेस्टर के विषय शिक्षा में अनिवार्य प्रश्न पत्र, विज्ञान (Science) विषय के सभी Unit के कुछ महत्वपुर्ण प्रश्नों का वर्णन यहाँ किया गया है। 

विज्ञान की आधारभूत विशेषताएँ (Basic Characteristics of Science) :

शिक्षा के क्षेत्र में अध्ययन के लिए प्रयुक्त किन विषयों को विज्ञान कहा जाय और किनको नहीं, यह एक विचारणीय प्रश्न है। इस बात का निर्णय इसी बात को आधार बनाकर किया जा सकता है कि उसकी प्रकृति विज्ञान की प्रकृति से किस सीमा तक मेल खाती है, उसमें शामिल विषय-सामग्री ज्ञान भण्डार का कौन सा स्वरूप होती है तथा अध्ययन के लिए इसमें क्या विधि अपनायी जाती है आदि। मोटे तौर पर विज्ञान कहलाने के लिए एक विषय विशेष में विज्ञान की कुछ निम्नलिखित आधारभूत विशेषताओं की उपस्थिति देखी जानी चाहिए-

1. विज्ञान के अंतर्गत ‘क्या था, क्या होना चाहिए’ इस बात पर विचार नहीं किया जाता ‘बल्कि क्या है’, ‘यह क्यों हो रहा है’ तथा ‘अगर वह इसी तरह चलता रहा तो इसका परिणाम क्या होगा’ आदि प्रश्नों के अध्ययनों को ही अपना लक्ष्य बनाया जाता है। 
 
2. इसके अध्ययन के लिए एक विशेष पद्धति अपनाई जाती है, जिसे वैज्ञानिक विधि (Scientific method) का नाम दिया जाता है। यह विधि अध्ययन के लिए प्रयुक्त अन्य विधियों की तुलना में बहुत अधिक निष्पक्ष (Impartial), वैध (Valid), विश्वसनीय (Reliable), निश्चित (Definite) तथा वस्तुगत (Objective) होती है। 
 
3. विज्ञान में अध्ययन के लिए सभी साधन, उपकरण और माध्यम पूर्णतया वैज्ञानिक होते हैं अर्थात् इनकी सहायता से जो भी प्रेक्षण तथा मापन किये जाते हैं उनकी निष्पक्षता, वैधता, वस्तुनिष्ठ और विश्वसनीयता पर कोई सन्देह नहीं किया जा सकता है। 
4. विज्ञान में इस तरह वैज्ञानिक विधि और वैज्ञानिक उपकरणों का प्रयोग करके प्रेक्षण तथा परीक्षण के सहारे जो भी ज्ञान भण्डार एकत्रित होता है उसके स्वरूप में विज्ञान की प्रकृति के अनुरूप निम्नलिखित विशेषताएँ पायी जाती हैं- 
  • वह निश्चित, पूर्ण वैध, विश्वसनीय, वस्तुगण तथा सत्यापनीय (Verifiable) होता है।
  • वह सार्वभौमिक (Universal) होता है।
  • वह नियमों तथा सिद्धान्तों के रूप में पूरी तरह व्यवस्थित एवं संगठित होता है।
  • उसे आगे ज्ञान प्राप्त करने तथा अनुसन्धान कार्य में भली-भाँति प्रयुक्त किया जा सकता है। 
 
5. विज्ञान अपने अध्ययन करने वाले व्यक्तियों के दृष्टिकोण में भी अपनी स्वयं की प्रकृति के अनुकूल पर्याप्त परिवर्तन ला देता है। इस दृष्टि से एक वैज्ञानिक तथा विज्ञान के विद्यार्थी का अध्ययन करने का ढंग वैज्ञानिक नहीं होता बल्कि उसका व्यक्तित्व भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला बन जाता है और परिणामस्वरूप निष्पक्ष रूप से तर्क, परीक्षण तथा प्रयोगों के आधार पर अपनी बात कहने तथा दूसरों की बात समझने का उनका स्वभाव बन जाता है। 
 
6. विज्ञान में संगृहीत ज्ञान तथा इस ज्ञान को इकट्ठा करने वाली वैज्ञानिक विधि दोनों में ही जो मूल धारणाएँ काम करती हैं वे अन्य विषयों के ज्ञान तथा अन्वेषण से काफी कुछ भिन्न होती हैं। ये धारणाएँ निम्नलिखित हैं- 
  • घटनाओं के घटने के पीछे कोई दैवी शक्ति नहीं होती, ये यन्त्रवत् घटित होती हैं।
  • इस प्रकार की सभी भौतिक घटनाएँ भौतिक कारणों से ही घटित होती हैं परन्तु इनकी घटित होने में कोई निश्चित नियम व क्रम अवश्य रहता है।
  • घटनाओं के घटित होने के कारणों का वैज्ञानिक स्तर पर अध्ययन किया जा सकता है। 
 
7. विज्ञान का ज्ञान-भण्डार और अध्ययन पद्धति इस प्रकार की होती है कि उसकी सहायता से किसी वस्तु या किसी घटना विशेष की पूरी सही जानकारी लेने में कोई दिक्कत नहीं आती है, जैसे वस्तु क्या है, उसकी क्या प्रकृति तथा विशेषताएँ हैं, घटना क्या है, घटना के घटित होने का क्या कारण है, इसके अन्तर्गत कौन-से चर (Variables) कार्य कर रहे हैं? इत्यादि। इस प्रकार विज्ञान वस्तुओं और घटनाओं का पूरा-पूरा सही विश्लेषण हमारे सामने उपस्थित कर सकने में समर्थ होता है तथा इन कार्य और कारण (Cause and Effect) के आधार पर इसकी व्याख्या करने में हमें समर्थ बनाता है। 
 
8. विज्ञान की एक अनूठी विशेषता उसकी भविष्यवाणी करने की क्षमता है। विज्ञान घटनाओं के घटित होने के कारण तथा अन्तर्निहित चरों (Variables) का अध्ययन कर यह बताने में पूरी तरह समर्थ होता है कि किन परिस्थितियों में कौन-सा पदार्थ किस प्रकार की प्रतिक्रिया करेगा तथा कब किस प्रकार की घटना या प्रक्रिया घटित होगी। इस तरह विश्वस्त भविष्यकथन विज्ञान की वैज्ञानिकता की सबसे बड़ी कसौटी माना जा सकता है। कोई विषय उतना ही वैज्ञानिक माना जाता है जितना कि उसमें भविष्यवाणी करने की क्षमता पायी जाती है। 

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