B.Ed. Sem 3-भूयिष्ठक या बहुलांक (Mode) क्या है?

B.Ed. Sem 3- Unit 4 notes

B.Ed. के द्वि-वर्षीय पाठ्यक्रम के तृतीय सेमेस्टर के विषय शिक्षा में मापन तथा मूल्यांकन (Measurement and Evaluation in Education) के सभी Unit के कुछ महत्वपुर्ण प्रश्नों का वर्णन यहाँ किया गया है। 

भूयिष्ठक या बहुलांक (Mode)

किसी समंक श्रेणी में जो भी मूल्य सबसे अधिक बार आता है उसे भूयिष्ठक कहते हैं।

बहुलांक की परिभाषा (Definition of Mode)- क्रॉक्सटन तथा कॉउडन

“बहुलांक विभिन्न अंकों का वह मूल्य है जिसके आसपास श्रेणी के अधिक-से-अधिक पद मूल्य केन्द्रित होते है।”

B.Ed. Sem 3-भूयिष्ठक या बहुलांक (Mode) क्या है?

एलहान्स के अनुसार –

“बहुलांक एक सम्पर्क माला का वह पद है जो सबसे अधिक बार आता है। यह श्रेणी के बाहुल्य मूल्य का सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि है, एक ऐसा प्रतिनिधि जिसे वास्तव में फैशन या प्रचलन कहा जा सकता है।”

गिलफोर्ड के अनुसार-

“माप के पैमाने पर बहुलांक वह बिन्दु है जहाँ पर वितरण में सबसे अधिक आवृत्तियाँ केन्द्रित होती हैं।”

भूयिष्ठक का वितरण – व्यक्तिगत श्रेणी में भूयिष्ठक का निर्धारण तब तक नहीं हो सकता है जब तक उसे खण्डित श्रेणी में परिवर्तित न किया जाय अतः सर्वप्रथम दिये गये समंकों की एक खण्डित श्रेणी बना ली जाती है तथा यह देख लेना चाहिए कि श्रेणी में किस मूल्य की आवृत्ति अधिकतम है यही मूल्य उस श्रेणी का भूयिष्ठक होगा।

भूयिष्ठक या बहुलांक के गुण (Merits of Mode)

  1. बहुलांक की गणना का हमारे नित्यप्रति के जीवन में अधिक महत्त्व है।
  2. भूयिष्ठक का निर्धारण करना अधिक सरल है वर्गान्तर श्रेणी को छोड़कर अधिकतर निरीक्षण द्वारा ही भूयिष्ठक का निर्धारण हो सकता है।
  3. भूयिष्ठक समझने में आसान है जन साधारण भी इसका अर्थ सरलता से समझ लेता है।
  4. भूयिष्ठक के मूल्य को रेखाचित्र द्वारा समझ लिया जाता है।
  5. मध्यांक की भाँति भूयिष्ठक पर भी श्रेणी की चरम सीमाओं का बहुत कम प्रभाव पड़ता है।
  6. भूयिष्ठक ज्ञात करने के लिए श्रेणी के सभी पदों का मूल्य ज्ञात करना आवश्यक नहीं है।
  7. किन्हीं दशाओं में भूयिष्ठक श्रेणी का सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व करता है।

भूयिष्ठक या बहुलांक की सीमाएँ या दोष (Limitations or Demerits of Mode)

  1. बहुलांक कभी-कभी वास्तविकता से बहुत दूर अथवा सन्देहपूर्ण होता है।
  2. समंक माला में यदि पद मूल्य एक संख्या के रूप में होता है तो बहुलांक अधिक सही हो सकता है।
  3. बहुलांक का अन्य सांख्यिकीय विधियों में उपयोग नहीं हो सकता है क्योंकि इसकी बीजगणितीय विवेचना सम्भव नहीं।
  4. बहुलांक के निर्धारण में समंक श्रेणी के चरम मूल्यों पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
  5. बहुलांक का निर्धारण बहुत बड़ी सीमा तक वर्ग विस्तार पर निर्भर होता है।

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